Facts To Be Considered While Upbringing Of A Child

आज के समय में एक समस्या हर घर में देखने को मिल रही हैं, वो है बच्चे का माता पिता से लगाव कम होना या उनकी आपस में कम बनना |

अक्सर माता पिता इस बात को "generation gap" के नाम पर या फिर अन्य नाम देकर अपना पल्ला झाड़ लेते है और जब आगे जाकर वही बच्चे उनके लिए परेशानी उत्तपन्न करते है तब माता पिता परेशान होते हैं| क्या हमने कभी इस बात पर चिंतन किया है की बच्चे अपने माँ बाप से अलग क्यो हो रहे है या उनमें इतना वैचारिक मतभेद क्यो बढ़ रहा हैं|

इसके लिए हमारे बच्चे जिम्मेदार हैं या "generation gap" तो उसका जवाब है कि माँ बाप खुद इसके लिए ज़िम्मेदार हैं|

इस बारे में विस्तार से बात करते हैं|

हम बच्चो का पालन पोषण प्रेम -वश करते है या मोह-वश |

 प्रेम-वश हमे यह बताता है कि हमारे बच्चो के लिए क्या सही है और क्या गलत, जब कि मोह में पड़े माँ बाप सिर्फ यह देखते है कि बच्चे को क्या अच्छा लगता है, जिसका परिणाम आगे चलकर बच्चा जिद्दी होने लगता है|

उसका बहुत अच्छा उदाहरण महाभारत में देखने को मिला है, जब युद्ध में अश्वथामा मारा गया है की खबर फैली थी तब गुरु द्रोणाचार्या और भगवान श्री कृष्ण में संवाद होता है| भगवान श्री कृष्ण , द्रोणाचार्या से कहते है आपने अपने पुत्र का मोह-वश पालन पोषण किया| आपने उसकी इच्छाओ की पूर्ति की पर उसे  स्वयं इस लायक नही बनाया कि वो खुद अपनी ज़रूरते पूरी कर पाता | आपने उसे उचित अनुचित का ज्ञान दिया होता तो शायद आज वो अधर्म के नहीं धर्म के साथ होता| आपने उसके विषयों की पूर्ति की पर उसे संस्कार नहीं दिया | उसको सब कुछ दिया पर शिक्षा नहीं दी|

यही आज के माँ बाप कर रहे हैं | वो बच्चो को खुश देखने के लिए जिससे उन्हे आनंद प्राप्त होता है, अपने अहम को संतुष्ट करके उनकी जरूरतों को पूरा कर रहें हैं| वो उन्हे हर जरूरत की चीज दे रहें हैं पर उन्हे संस्कार नहीं दे रहे है और ना ही शिक्षा दे रहे है, सही गलत की|

प्रेम कभी भी जिद्द पूरी नहीं करता है, प्रेम सही और गलत में फर्क करता है, प्रेम उन्नति के मार्ग पर ले जाता है|

मोह में व्यक्ति वही करता है जो सामने वाले को अच्छा लगता है और खुद को | और यही मोह पतन का कारण बनता है|

इसलिए यह आवश्यक है कि बच्चो की इच्छाओ की पूर्ति से पहले उनको ज्ञान दें, उनका मार्गदर्शन करें, सही-गलत,उचित-अनुचित का भेद बताएँ|

जीवन के कटु अनुभव करवाएँ , उनको भविष्य के लिए तैयार करने के लिए अच्छे संस्कार दें, ना कि उनकी इच्छाओ की पूर्ति करते हुए पतन का मार्ग प्रशरत करें | उन्हे सत्कर्मों का महत्व और उनकी प्रधानता बतायें |

तभी एक अच्छे युग् का निर्माण संभव हैं|

"विषय की पूर्ति से ज्यादा विषय का ज्ञान आवश्यक हैं"


Comments

No comment added yet, comment Now

Leave a comment