Mental Health/मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य

डिप्रेशन का इलाज करें, नज़रअंदाज नही

कई बार एक व्यक्ति डिप्रेशन में होता तो है, लेकिन उसे इस बात का एहसास नही होता, ज़रूरी है की उसके आस पास रहने वेल उसके व्यक्तित्व में आए बदलावों को पहचाने ओर उसकी मदद करे...

विश्व स्वास्थय संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 38 मिलियन भारतीय आज किसी न किसी मानसिक समस्या का सामना कर रहे हैं, who के अनुसार आने वाले वर्षो मे डिप्रेशन विश्व का सबसे बड़ा रोग के रूप मे उभर कर सामने आएगा, आज हमारे देश में मानसिक समस्याओं पर लोग खुलकर बात करना पसंद नही करते , लोगो को लगता है की अगर वह अपनी मानसिक या व्यवहारिक समस्या किसी को बताते है तो वे समाज में सहानुभूति  या मज़ाक का विषय  बन जाएगे, नतीजतन , समस्या कम होने के बजाय बढ़ जाती है|

मानसिक रोगो में सोशल मीडिया की अहम भूमिका

दूसरे सबसे बड़े कारण है, मोबाइल ओर सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल, इसकी वजह से कई घरो मे मानसिक तनाव ने अपना घर बना  लिया है, हम समझ ही नही पाते है कि कब हम इन चीज़ो का इस्तेमाल करते हुए रोगी बन जाते है जो समय हमे घर वालो को देना चाहिए, परिवार के साथ बिताना चाहिए वो हम मोबाइल पर बिता रहे है, जिससे हम अपने परिवार से दूर हो रहे है, इमोशनल लेवल पे हमारा कोई संपर्क नही है या कम होता जा रहा है|

ज़रूरी है जागरूकता

जागरूकता के अभाव मे हम मानसिक परेशानियों के लक्षणों को पहचान नही पाते या नज़रअंदाज कर देते है, जो गंभीर मनोरोग का रूप धारण कर सकते है, सबसे ज़रूरी बात यह है की पीड़ित व्यक्ति को खुद इन  लक्षणों का एहसास नही होता है, ऐसे मे परिवार ओर दोस्तों की ज़िम्मेदारी है की वे इस पर ध्यान दे देते हुए जल्द ही पीड़ित को क्लिनिकल साइकॉलॉजिस्ट के पास ले जाए|

मानसिक बीमारी के लक्षण

-आत्मघाती विचार

-लंबे समय तक अवसाद( उदासी या चिड़चिड़ापन)

-अत्यधिक उतार चढ़ाव की भावनाए

-अत्यधिक भय, व्यग्रता और चिंताए

-समाज से दूरी बनाना

-खाने या नींद की आदतो मे अचानक बदलाव

-अत्यधिक क्रोध की भावनाएं

-विचित्र विचार्या भ्रमित सोच

-ऐसी चीज़े देखना या सुनना जो नही हैं

-दैनिक समस्याओ और गतिविधियों से निपटने मे असमर्थता का बढ़ना

मानसिक रोगो से बचाव

-मानसिक रोगो को शुरुआती दौर मे बिना दवाओ के काउंसलिंग और फिजियोथेरेपी से ठीक किया जा सकता है|
हम ख़ान पान और दैनिक दिनचर्या मे बदलाव लाए, एक्सरसाइज करे और योगा करे और अच्छे ख़ान पान ले इससे मानसिक रोग से बचा जा सकता है|

- कई बार बचपन में बच्चो को माता पिता का प्यार उतना नही मिल पाता, जितना एक सामान्य बच्चे को मिलना चाहिए, समय की कमी के कारण भी ऐसा होता है|

-कई बार बच्चो का तिरस्कार भी कर दिया जाता है, ऐसे बच्चे अपने आपको अकेला महसूस करते है|

बच्चो पर होता है गहरा असर

बचपन मे जब बच्चों के साथ किसी प्रकार की नकारात्मक घटना घटती है जैसे परिवार मे किसी की मर जाना या शोषण तो इनसे उनके व्यक्तिव के विकास पर असर पड़ता है, उनकी परिस्थियो से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, ऐसे सदमो से उनके व्यवहार मे असामान्यता आ जाती है, कई पेरेंट्स अपने बच्चो के लिए सख़्त नियम तय करते है, किसी भी शारीरिक बीमारी के लक्षण दिखाते है तो हम तुरंत डॉक्टर से सलाह लेते है लेकिन ये भूल जाते है कि शरीर की तरह कभी हमारा मन भी बीमार हो सकता है|


Comments

Komal on October 1, 2018 2:23 am

Good suggestions..well done

Komal on October 1, 2018 2:23 am

Good suggestions..well done

Leave a comment